अव्यक्त–पुरुष–विवेकः (Discrimination of Avyakta/Prakṛti and Puruṣa) — Yājñavalkya’s Anvīkṣikī to Viśvāvasu
स तमोनुद इत्युक्त: सर्वज्ञैर्वेंदपारगै: | विमलो वितमस्कक्न निर्लिड्रोडलिड्भरसंज्ञित:,सूक्ष्म बुद्धिरूप धन-सम्पन्न पुरुष ही मनोमय दीपकके द्वारा उस लोकस्रष्टा परमात्माका साक्षात्कार कर सकते हैं। वह परमात्मा महान् अन्धकारसे परे और तमोगुणसे रहित है; इसलिये वेदके पारगामी सर्वज्ञ पुरुषोंने उसे तमोनुद (अज्ञान नाशक) कहा है। वह निर्मल, अज्ञानरहित, लिंगहीन और अलिंग नामसे प्रसिद्ध (उपाधिशून्य) है। यही योगियोंका योग है। इसके सिवा योगका और क्या लक्षण हो सकता है। इस तरह साधना करनेवाले योगी सबके द्रष्टा अजर-अमर परमात्माका दर्शन करते हैं
sa tamonuda ity uktaḥ sarvajñair vedapāragaiḥ | vimalaḥ vitamaskaś ca nirliṅgo ’liṅgasaṃjñitaḥ ||
วสิษฐะกล่าวว่า—เหล่าฤๅษีผู้รอบรู้ ผู้ข้ามฟากแห่งพระเวท เรียกพระองค์ว่า “ตโมนุท” คือผู้ขจัดความมืด (อวิชชา) พระองค์บริสุทธิ์ ผ่องใส อยู่เหนือความมืดทึบแห่งตมัส ปราศจากม่านหมองมัวทั้งปวง; ไร้เครื่องหมายหรือสัญลักษณ์จำกัดใด ๆ แต่ก็กล่าวขานว่า “ผู้ไร้เครื่องหมาย” ด้วยการเพ่งพินิจภายในอันละเอียด—ประหนึ่งประทีปแห่งจิต—โยคีย่อมประจักษ์แจ้งต่อพระสักขีแห่งสรรพสิ่ง ผู้ไม่เกิดและไม่ตาย
वसिष्ठ उवाच