अव्यक्त-गुण-पुरुषविवेकः | Avyakta, Guṇas, and Discrimination of Puruṣa
विविक्ताश्नापि शैलानां गुहा गृहनिभोपमा: । विविक्तानि च जप्यानि व्रतानि विविधानि च,कभी पर्वतोंकी एकान्त गुफाओंमें, जो गृहके समान ही होती हैं, निवास करता है। उन स्थानोंमें नाना प्रकारके गोपनीय जप, व्रत, नियम, तप, यज्ञ तथा अन्य भाँति-भाँतिके कर्मोका अनुष्ठान करता है
บางคราวเขาพำนักอยู่ในถ้ำภูเขาอันสงัด ซึ่งประหนึ่งเป็นเรือน; ณ ที่นั้นเขากระทำการสวดภาวนา (ชปะ) อันเร้นลับ และถือวัตร (วรตะ) นานาประการ
वसिष्ठ उवाच