अध्याय २९७ — श्रेयः, धृति, दान-नियमाः
Welfare, Steadfastness, and Norms of Giving
शरीरिणा परित्यक्तं निश्रेष्टं गतचेतनम् | भूतै: प्रकृतिमापन्नैस्ततो भूमौ निमज्जति,जब जीवात्मा इस देहका परित्याग कर देता है, तब यह देह निश्चेष्ट और चेतनाशून्य हो जाती है एवं इसके पाँच भूत अपनी-अपनी प्रकृतिके साथ मिल जाते हैं। फिर तो यह पृथ्वीमें निमग्न हो जाती है
เมื่อชีวาตมันละทิ้งกายนี้แล้ว กายย่อมกลายเป็นสิ่งนิ่งไร้การเคลื่อนไหวและปราศจากสติรู้; มหาภูตทั้งห้ากลับคืนสู่สภาวะธรรมชาติของตน ๆ แล้วกายนั้นก็ย่อมจมสู่แผ่นดิน
पराशर उवाच