Adhyāya 287 — Janaka’s Inquiry on Śreyas, Abhayadāna, and Asaṅga
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न यान्ति चैव ते सम्यगभिप्रेतमसंशयम् । अन्येडपश्यंस्तथा सम्यगाश्रमाणां परां गतिम्,जो साधारण मनुष्य हैं, वे उन आश्रमोंके वास्तविक अभिप्रायको भलीभाँति संशयरहित नहीं जान पाते, किंतु उनसे भिन्न जो तत्त्वज्ञ हैं, वे इन आश्रमोंके परमतत्त्वको ठीक-ठीक समझते हैं
คนทั่วไปย่อมไม่อาจรู้เจตนาที่แท้ของอาศรมเหล่านั้นได้อย่างถูกต้องโดยปราศจากความสงสัย แต่ผู้รู้สัจธรรมย่อมเห็นได้โดยชอบถึงคติอันสูงสุดของอาศรมทั้งหลาย
नारद उवाच