आत्मदर्शन-उपदेशः (Ātma-darśana Upadeśa) — Mind, Senses, and the All-pervading Self
पृथक् संवत्सराग्राणि प्रवक्ष्याम्यनुपूर्वश: । कृते त्रेतायुगे चैव द्वापरे च कलौ तथा,पहले मनुष्योंके जो दिन-रात बताये गये हैं, उन्हींकी संख्याके हिसाबसे अब मैं ब्रह्माके दिन-रातका मान बताता हूँ। साथ ही सत्ययुग, त्रेता, द्वापए और कलियुग--इन चारों युगोंकी वर्ष-संख्या भी अलग-अलग बता रहा हूँ
pṛthak saṃvatsarāgrāṇi pravakṣyāmy anupūrvaśaḥ | kṛte tretāyuge caiva dvāpare ca kalau tathā ||
วยาสตรัสว่า—เราจักแสดงมาตราปีที่แตกต่างกันตามลำดับ และจักกล่าวแยกเป็นส่วนๆ ถึงจำนวนปีของยุคกฤต (สัตยะ), เตรตา, ทวาปร และกาลีด้วย
व्यास उवाच