ब्राह्मणस्य पूर्वतरा वृत्तिः — The Earlier Ideal Conduct of a Brahmana
River-of-Saṃsāra Metaphor
यदि कर्ता भवेत् कर्ता न क्रियेत कदाचन । यस्मात्तु क्रियते कर्ता तस्मात् कर्ताप्यनीश्वरः,यदि कार्य करनेवाला पुरुष स्वयं ही कर्ता होता तो उसको उत्पन्न करनेवाला दूसरा कोई कभी न होता। वह दूसरेके द्वारा उत्पन्न किया जाता है; इसलिये कालके सिवा दूसरा कोई कर्ता नहीं है
หากผู้กระทำเป็นผู้กระทำโดยลำพังอย่างแท้จริง ก็ย่อมไม่มีผู้ใดอื่นที่จะก่อกำเนิดเขาได้เลย แต่เมื่อผู้กระทำยังถูกก่อให้เกิดโดยสิ่งอื่น ฉะนั้นผู้กระทำเองก็หาใช่ผู้เป็นใหญ่โดยอิสระไม่
भीष्म उवाच