भूतानां निधन निष्ठा स्रोतसामिव सागर: । नैतत् सम्यग्विजानन्तो नरा मुहान्ति वज्धृक्,वज्रधारी इन्द्र! जैसे जलके प्रवाहोंका अन्तिम आश्रय समुद्र है, उसी प्रकार शरीरधारियोंकी अन्तिम गति मृत्यु है। जो पुरुष इस बातको अच्छी तरह जानते हैं, वे कभी मोहमें नहीं पड़ते हैं
โอ้อินทร์ผู้ทรงวัชระ! ดุจสายน้ำทั้งหลายมีมหาสมุทรเป็นที่รองรับสุดท้าย ฉันใด ความตายก็เป็นที่สุดของผู้มีร่างกายฉันนั้น ผู้ใดรู้ความจริงนี้โดยชอบ ย่อมไม่หลงมัวเมา
श॒क्र उवाच