Śrī–Indra–Bali Saṃvāda: The Departure and Fourfold Placement of Lakṣmī
तस्या: पुत्रत्वमागम्य स्त्रिया: स पिबति स्तनौ । ततः स कापिलेयत्वं लेभे बुद्धिं च नैषछ्लेकीम्,उन्हींके शिष्य पंचशिख थे, जो मानवी स्त्रीके दूधसे पले थे। कपिला नामवाली कोई कुटुम्बिनी ब्राह्मणी थी। उसी स्त्रीके पुत्रभावको प्राप्त होकर वे उसके स्तनोंका दूध पीते थे; अतः कपिलाका पुत्र कहलानेके कारण कापिलेय नामसे उनकी प्रसिद्धि हुई। उन्होंने नैप्ठिक (ब्रह्ममें निष्ठा रखनेवाली) बुद्धि प्राप्त की थी
เมื่อได้รับการนับถือว่าเป็นบุตรของนาง เขาจึงดูดน้ำนมจากทรวงอกของนาง ด้วยเหตุนั้นจึงได้ชื่อว่า ‘กาปิเลยะ’ และยังบรรลุปัญญาอันมั่นคงแบบผู้สละเรือน—ตั้งมั่นในพรหมัน
भीष्म उवाच