जापक–इक्ष्वाकु–सत्यविवादः
The Jāpaka, Ikṣvāku, and the Dispute on Truth and Merit
भवति चात्र श्लोक:-- गुरुं यस्तु समाराध्य द्विजो वेदमवाप्रुयात् । तस्य स्वर्गफलावाप्ति: सिध्यते चास्य मानसमिति,इस विषयमें यह श्लोक है-- जो द्विज गुरुकी आराधना करके वेदाध्ययन करता है, उसे स्वर्गलोककी प्राप्ति होती है और उसका मानसिक संकल्प सिद्ध होता है
भरद्वाज उवाच