दान-धर्म-आश्रमविधानम्
Dana, Dharma, and the Four Āśramas
भरद्वाज उवाच कथं सलिलमुत्पन्नं कथं चैवाग्निमारुतौ | कथं वा मेदिनी सूष्टेत्यत्र मे संशयो महान्,भरद्वाजने पूछा--भगवन्! जलकी उत्पत्ति कैसे हुई? अग्नि और वायुकी सृष्टि किस प्रकार हुई तथा पृथ्वीकी भी रचना कैसे की गयी, इस विषयमें मुझे महान् संदेह है
bharadvāja uvāca kathaṃ salilam utpannaṃ kathaṃ caivāgnimārutau | kathaṃ vā medinī sṛṣṭety atra me saṃśayo mahān |
ภรทวาชกล่าวว่า “ข้าแต่พระผู้เป็นเจ้า น้ำบังเกิดขึ้นได้อย่างไร? ไฟและลมเกิดขึ้นได้อย่างไร? แล้วแผ่นดินถูกก่อรูปขึ้นอย่างไร? ในเรื่องเหล่านี้ ข้าพเจ้ามีความสงสัยยิ่งนัก”
भरद्वाज उवाच