तस्माद् धर्मप्रधानेन भवितव्यं यतात्मना । तथा च सर्वभूतेषु वर्तितव्यं यथात्मनि,अतः मनको वशमें करके धर्मको अपना प्रधान ध्येय बनाना चाहिये और सम्पूर्ण प्राणियोंके साथ वैसा ही बर्ताव करना चाहिये, जैसा हम अपने लिये चाहते हैं
เพราะฉะนั้นพึงข่มใจให้ได้ แล้วตั้งธรรมะเป็นเป้าหมายสูงสุด และพึงประพฤติต่อสรรพสัตว์ทั้งปวงดังที่ตนปรารถนาให้ผู้อื่นประพฤติต่อตน
विदुर उवाच