Daṇḍa as the Foundation of Social Order (दण्डप्रतिष्ठा)
सूक्ष्ममोनीनि भूतानि तर्कगम्यानि कानिचित् । पक्ष्मणो5पि निपातेन येषां स्यथात् स्कन्धपर्यय:,कितने ही ऐसे सूक्ष्म योनिके जीव हैं जो अनुमानसे ही जाने जाते हैं। मनुष्यकी पलकोंके गिरनेमात्रसे जिनके कंधे टूट जाते हैं (ऐसे जीवोंकी हिंसासे कोई कहाँ-तक बच सकता है?)
ยังมีสรรพชีวิตกำเนิดอันละเอียดลึกยิ่งนักมากมาย ซึ่งรู้ได้เพียงด้วยการคาดคะเน; เพียงเปลือกตาของมนุษย์ตกลงก็ทำให้บ่าของมันหักได้—แล้วใครเล่าจะหลีกพ้นจากการเบียดเบียนชีวิตเช่นนั้นได้ถึงเพียงไหน?
अजुन उवाच