दीर्घदर्शी–दीर्घसूत्र–संप्रतिपत्तिमान् आख्यानम्
The Parable of Foresight, Procrastination, and Presence of Mind
दुराचार: क्षीणबल: परित्राणं न गच्छति । अथ तस्मादुद्विजते सर्वो लोको वृकादिव,जिसका बल नष्ट हो गया है, जो दुराचारी है, उसको भय उपस्थित होनेपर कोई रक्षक नहीं मिलता है। दुर्बलसे सब लोग उसी प्रकार उद्विग्न हो उठते हैं, जैसे भेड़ियेसे
durācāraḥ kṣīṇabalaḥ paritrāṇaṁ na gacchati | atha tasmād udvijate sarvo loko vṛkād iva |
ผู้มีความประพฤติชั่วและกำลังเสื่อมถอย ย่อมไม่อาจเข้าถึงที่พึ่งเมื่อความหวาดกลัวบังเกิด ครั้นแล้วโลกทั้งปวงย่อมระแวงผู้ที่อ่อนแรงนั้น ดุจเดียวกับที่ตระหนกต่อหมาป่า
भीष्म उवाच