Kośa, Bala, and Maryādā: Treasury, Capacity, and Enforceable Limits (कोश-बल-मर्यादा)
नैतौ सम्भवतो राजन् कथंचिदपि पार्थिव । न हारण्येषु पश्यामि धनवृद्धानहं क्वचित्,राजन! पृथ्वीनाथ! धनका संग्रह और उसका त्याग--ये दोनों एक व्यक्तिमें एक ही साथ किसी तरह नहीं रह सकते; क्योंकि मैं वनमें रहनेवाले त्यागी महात्माओंको कहीं भी धनमें बढ़ा-चढ़ा नहीं देखता
ข้าแต่พระราชา ผู้เป็นเจ้าแห่งแผ่นดิน! การสั่งสมทรัพย์และการสละทรัพย์—สองสิ่งนี้ย่อมไม่อาจดำรงอยู่พร้อมกันในคนผู้เดียวได้เลย เพราะเราไม่เคยเห็นมหาตมะผู้สละโลกซึ่งอยู่ป่า พอกพูนทรัพย์สินที่ใด
भीष्म उवाच