Satya–Anṛta Viveka (Discrimination between Truth and Falsehood) | सत्य–अनृत विवेकः
न तेभ्यो5पि धनं देयं शक्ये सति कथंचन । पापेभ्यो हि धनं दत्तं दातारमपि पीडयेत्,यदि शपथ खा लेनेसे भी पापियोंके हाथसे छुटकारा मिल जाय तो वैसा ही करे। जहाँतक वश चले, किसी तरह भी पापियोंके हाथमें धन न जाने दे; क्योंकि पापाचारियोंको दिया हुआ धन दाताको भी पीड़ित कर देता है
หากทำได้ ไม่พึงให้ทรัพย์แก่คนบาปไม่ว่าโดยทางใด; เพราะทรัพย์ที่ให้แก่คนบาปย่อมกลับมาทำร้ายแม้ผู้ให้เอง.
भीष्म उवाच