गदायुद्धप्रतिज्ञा — The Vow and Terms of the Mace Duel
अरथश्षानिषज्जी च निहतः पार्ष्णिसारथि: | एकश्चाप्यगण: संख्ये प्रत्याश्चासमरोचयम्,मेरे पास न तो रथ है और न तरकस। मेरे पार्श्वरक्षक भी मारे जा चुके हैं। मेरी सेना नष्ट हो गयी और मैं युद्धस्थलमें अकेला रह गया था; इस दशामें मुझे कुछ देरतक विश्राम करनेकी इच्छा हुई
ข้าไม่มีทั้งรถศึกและแล่งธนู; ทั้งผู้คุ้มกันข้างกายและสารถีของข้าก็ถูกสังหารแล้ว ในศึกกองทัพของข้าถูกทำลายจนข้าเหลือเพียงลำพัง; ด้วยเหตุนี้ข้าจึงปรารถนาจะพักอยู่ชั่วครู่
दुर्योधन उवाच