धृतराष्ट उवाच प्रागेव सुमहत् कर्म द्रौणिरेतन्महारथ: । नाकरोदीदृशं कस्मान्मत्पुत्रविजये धृत:,राजा धृतराष्ट्रने पूछा--संजय! अश्वत्थामा तो मेरे पुत्रको विजय दिलानेका दृढ़ निश्चय कर चुका था। फिर उस महारथी वीरने पहले ही ऐसा महान् पराक्रम क्यों नहीं किया?
ธฤตราษฏระตรัสว่า “สัญชัย! อัศวัตถามา บุตรแห่งโทรณะ ได้ตั้งใจแน่วแน่เพื่อชัยชนะของบุตรเราแล้ว เหตุใดมหารถีผู้นั้นจึงไม่แสดงมหาวีรกรรมเช่นนี้ตั้งแต่ก่อน?”
धृतराष्ट उवाच