यैषा पाञउ्चालराजस्य सुता सा श्रीरनुत्तमा । पाज्चाली पाण्डवानेतान् दैवसृष्टोपसर्पति,तदनन्तर सब धर्मोके ज्ञाता परम बुद्धिमान् विदुरने कहा--“भरतवंशियो! यह कृष्णा जो तुम्हारी सभामें लायी गयी, यही तुम्हारे विनाशका कारण होगा। यह जो पांचालराजकी पुत्री है, वह परम उत्तम लक्ष्मी ही है। देवताओंकी आज्ञासे ही पांचाली इन पाण्डवोंकी सेवा करती है
dhṛtarāṣṭra uvāca | yaiṣā pāñcālarājasya sutā sā śrīr anuttamā | pāñcālī pāṇḍavān etān daivasṛṣṭopasarpati |
นางผู้นี้เป็นธิดาแห่งกษัตริย์ปาญจาล—นางคือศรีอันหาที่เปรียบมิได้; ด้วยบัญชาแห่งเทวะ ปาญจาลีจึงเข้ามาใกล้และผูกพันกับปาณฑพเหล่านี้
धृतराष्ट उवाच