पुनर्द्यूत-समाह्वानम्
Renewed Summons to the Dice-Game and Exile Wager
धिगस्तु नष्ट: खलु भारतानां धर्मस्तथा क्षत्रविदां च वृत्तम् | यत्र हातीतां कुरुधर्मवेलां प्रेक्षन्ति सर्वे कुरव: सभायाम्,अहो! धिककार है! भरतवंशके नरेशोंका धर्म निश्चय ही नष्ट हो गया तथा क्षत्रियधर्मके जाननेवाले इन महापुरुषोंका सदाचार भी लुप्त हो गया; क्योंकि यहाँ कौरवोंकी धर्ममर्यादाका उल्लंघन हो रहा है, तो भी सभामें बैठे हुए सभी कुरुवंशी चुपचाप देख रहे हैं
น่าอัปยศยิ่งนัก! ธรรมของกษัตริย์วงศ์ภารตะย่อมพินาศแล้ว และความประพฤติอันสมควรของมหาบุรุษผู้รู้ธรรมแห่งกษัตริย์ก็เสื่อมสูญไป เพราะที่นี่กำลังล่วงละเมิดขอบเขตธรรมของกุรุ แต่เหล่ากุรุทั้งปวงในสภากลับนั่งมองอยู่เงียบงัน
वैशम्पायन उवाच