न श्रेयसे नीयते मन्दबुद्धि: स्त्री श्रोत्रियस्थेव गृहे प्रदुष्टा । ध्रुवं न रोचेद् भरतर्षभस्य पति: कुमार्या इव षष्टिवर्ष:,जैसे श्रोत्रियके घरमें दुराचारिणी स्त्री कल्याणमय अग्निहोत्र आदि कार्योंमें नहीं लगायी जा सकती, उसी प्रकार मन्दबुद्धि पुरुषको कल्याणके मार्गपर नहीं लगाया जा सकता। जैसे कुमारी कन्याको साठ वर्षका बूढ़ा पति नहीं पसंद आ सकता, उसी प्रकार भरतवंशशिरोमणि दुर्योधनको निश्चय ही मेरा उपदेश रुचिकर नहीं प्रतीत होता
ดุจดังในเรือนของผู้ทรงเวท (ศฺโรตริยะ) หญิงผู้ประพฤติชั่วไม่อาจถูกนำไปประกอบกิจอันเป็นมงคล เช่น อัคนิโหตระ เป็นต้น ฉันใด บุรุษผู้ปัญญาทึบก็ฉันนั้น ย่อมไม่อาจถูกชักนำไปสู่หนทางแห่งศฺเรยะได้ และดุจดังหญิงสาวย่อมไม่พึงชอบสามีชราวัยหกสิบปี ฉันใด ทุรโยธนะผู้เป็นยอดแห่งวงศ์ภรตะ ย่อมไม่รื่นรมย์ต่อคำตักเตือนของข้าพเจ้าเป็นแน่ ฉันนั้น
विदुर उवाच