सभा-पर्व (अध्याय ६०) — द्रौपदी-प्रश्नः सभायाम् / Draupadī’s Question in the Assembly
वैशम्पायन उवाच ततो जग्राह शकुनिस्तानक्षानक्षतत्त्ववित् । जितमित्येव शकुनिर्युधिष्ठिरमभाषत,वैशम्पायनजी कहते हैं--जनमेजय! तदनन्तर पासे फेंकनेकी कलामें अत्यन्त निपुण शकुनिने उन पासोंको हाथमें लिया और उन्हें फेंककर युधिष्ठिरसे कहा--“लो, यह दाँव मैंने जीता”
ไวศัมปายนะกล่าวว่า “แล้วศากุนิ ผู้ชำนาญในกลศึกแห่งลูกเต๋า ได้หยิบลูกเต๋านั้นขึ้นมา ทอดลง แล้วกล่าวแก่ยุธิษฐิระว่า ‘ชัยชนะเป็นของเรา’”
वैशम्पायन उवाच