Dyūta-āhvāna: Śakuni’s Proposal, Vidura’s Warning, and the Summons of Yudhiṣṭhira
Sabhā-parva 51
जातरूपमनर्घ्य च ददुस्तस्यैकपादका: । एकपाददेशीय राजाओंने इन्द्रगोप (बीरबहूटी)-के समान लाल, तोतेके समान हरे, मनके समान वेगशाली, इन्द्रधनुषके तुल्य बहुरंगे, संध्याकालके बादलोंके सदूश लाल और अनेक वर्णवाले महावेगशाली जंगली घोड़े एवं बहुमूल्य सुवर्ण उन्हें भेंटमें दिये || २१-२२ ३ || चीनाउ्छकांस्तथा चौड़ान् बर्बरान् वनवासिन:,चीन, शक, ओड्, वनवासी बर्बर, वार्ष्णेय, हार, हूण, कृष्ण, हिमालयप्रदेश, नीप और अनूप देशोंके नाना रूपधारी राजा वहाँ भेंट देनेके लिये आये थे, किंतु रोक दिये जानेके कारण दरवाजेपर ही खड़े थे। उन्होंने अनेक रूपवाले दस हजार गधे भेंटके लिये वहाँ प्रस्तुत किये थे, जिनकी गर्दन काली और शरीर विशाल थे, जो सौ कोसतक लगातार चल सकते थे। वे सभी सिखलाये हुए तथा सब दिशाओंमें विख्यात थे
jātarūpam anarghyaṃ ca dadus tasyaikapādakāḥ |
ชาวแคว้นเอกปาทกะถวายแก่เขาซึ่งทองคำชาตรูปอันประเมินค่าไม่ได้ และของกำนัลล้ำค่าอื่น ๆ
दुर्योधन उवाच