Śiśupāla-janma-lakṣaṇaṃ (Śiśupāla’s birth marks and the prophecy of his end)
मा भैस्त्वं कुरुशार्दूल श्वा सिंहं हन्तुमरहति । शिव: पन्था: सुनीतो<त्र मया पूर्वतरं वृत:,“कुरुवंशके वीर! तुम डरो मत, क्या कुत्ता कभी सिंहको मार सकता है? हमने कल्याणमय मार्ग पहले ही चुन लिया है (श्रीकृष्णका आश्रय ही वह मार्ग है जिसका मैंने वरण कर लिया है)
ภีษมะกล่าวว่า “อย่าหวาดหวั่นเลย โอ้ยอดวีรชนแห่งกุรุ สุนัขจะฆ่าสิงห์ได้อย่างไร? ณ ที่นี้เราได้เลือกหนทางอันเป็นมงคลและดำเนินอย่างถูกต้องไว้ก่อนแล้ว”
वैशम्पायन उवाच