अग्रतस्तस्य गच्छन्ति मांसहेतोर्भयानका: । प्रजानाथ! कंक, गृध्र, बक, बाज और कौए आदि भयानक पक्षी मांसके लिये उनके आगे-आगे जा रहे थे ।। निमित्तानि च धन्यानि पाण्डवस्य शशंसिरे,प्रयाहि शीघ्र॑ गोविन्द सूतपुत्रजिघांसया । “गोविन्द! अब मेरा रथ तैयार हो। उसमें पुनः उत्तम घोड़े जोते जायँ और मेरे उस विशाल रथमें सब प्रकारके अस्त्र-शस्त्र सजाकर रख दिये जायाँ। अअभ्वारोहियोंद्वारा सिखलाये और टहलाये गये घोड़े रथसम्बन्धी उपकरणोंसे सुसज्जित हो शीघ्र यहाँ आवें और आप सूतपुत्रके वधकी इच्छासे जल्दी ही यहाँसे प्रस्थान कीजिये”
sañjaya uvāca | agratas tasya gacchanti māṃsahetor bhayānakāḥ | prajānātha! kaṅka-gṛdhra-baka-bāja-kākādayo bhayānakāḥ pakṣiṇaḥ māṃsāya teṣām agregre gacchanti || nimittāni ca dhanyāni pāṇḍavasya śaśaṃsire | prayāhi śīghraṃ govinda sūtaputra-jighāṃsayā ||
สัญชัยกล่าวว่า “เบื้องหน้าเขา นกอันน่าหวาดหวั่นซึ่งมุ่งหวังเนื้อ ได้บินนำหน้าไป ราวกับคาดหมายการฆ่าฟัน และนิมิตมงคลก็บอกความรุ่งเรืองแก่ปาณฑพด้วย ‘จงไปโดยเร็ว โควินทะ’ ด้วยปณิธานจะสังหารบุตรแห่งสารถีผู้นั้น”
संजय उवाच