कर्णनिधनवृत्तान्तनिवेदनम् | Reporting Karṇa’s Fall to Yudhiṣṭhira
न तं पश्यामि कौन्तेय यस्ते वध्यो भविष्यति । प्रहर्तुमिच्छसे कस्मात् कि वा ते चित्तविभ्रम:,“कुन्तीनन्दन! मैं किसी ऐसे मनुष्यको भी यहाँ नहीं देखता, जो तुम्हारे द्वारा वध करनेके योग्य हो। फिर तुम प्रहार क्यों करना चाहते हो? तुम्हारे चित्तमें भ्रम तो नहीं हो गया है?
สัญชัยกล่าวว่า “โอ้โอรสแห่งกุนตี! เราไม่เห็นผู้ใดเลยที่ควรถูกท่านสังหารในที่นี้ แล้วเหตุใดท่านจึงปรารถนาจะลงมือโจมตี? หรือจิตของท่านเกิดความหลงสับสน?”
संजय उवाच