कर्णपुत्रवधः (The Fall of Vṛṣasena) — Karṇa Parva, Adhyāya 62
पार्थमासाद्य राधेय उपहास्यो भविष्यसि । “इनके अस्त्र-शस्त्र और कवच नष्ट हो गये हैं। तीर और तरकस भी कट गये हैं। सारथि और घोड़े भी थके हुए हैं तथा शत्रुओंने इन्हें अस्त्रोंद्राया आच्छादित कर दिया है। राधानन्दन! अर्जुनके सामने पहुँचकर तुम उपहासके पात्र बन जाओगे'
“เมื่อเข้าไปเผชิญหน้าปารถะ โอ้ราธेय เจ้าย่อมตกเป็นที่เย้ยหยัน อาวุธและเครื่องศาสตราของเจ้าอันพินาศแล้ว เกราะก็แตกหัก ศรและแล่งศรก็ถูกตัดขาด สารถีกับม้าก็อ่อนล้า และศัตรูได้คลุมเจ้าไว้ด้วยห่าฝนแห่งลูกศร”
संजय उवाच