कर्णपर्व — अध्याय ५७
Arjuna’s targeted advance; Śalya–Karṇa dialogue; interception attempts
जल पीत्वा मृतान् पश्य पिबतो<न््यांश्व॒ मारिष,'श्रेष्ठ वीर अर्जुन! उधर देखो, कुछ लोग पानी पीकर मर गये और कुछ लोग पीते-पीते ही अपने प्राण खो बैठे। कितने ही बान्धवजनोंके प्रेमी सैनिक अपने प्रिय बान्धवोंको छोड़कर उस महासमरमें जहाँ-तहाँ प्राणशून्य हुए दिखायी देते हैं
สัญชัยกล่าวว่า—โอ้มาริษ จงดูเถิด; บางคนดื่มน้ำแล้วตาย บางคนสิ้นใจขณะกำลังดื่ม เหล่าทหารผู้รักญาติพี่น้องจำนวนมากละทิ้งคนอันเป็นที่รัก แล้วนอนแน่นิ่งไร้ลมหายใจอยู่เกลื่อนกลาดในมหาสงครามนั้น
संजय उवाच