अध्याय २९: कर्णस्य शल्यं प्रति शापस्मरणं च युद्धनिश्चयः | Chapter 29: Karṇa recalls curses to Śalya and declares resolve for battle
चेकितानश्न बलवान् धर्मराजश्न सुब्रत: । एते रथाश्रद्धिरदै: पत्तिभिक्षोग्रविक्रमै:,इसके बाद दुन्तीपुत्रोंकी सेनाके सभी प्रमुख वीर कर्णको पीड़ा देने लगे। युधामन्यु, शिखण्डी, द्रौपदीके पाँचों पुत्र, प्रभद्रकगण, उत्तमौजा, युयुत्सु, नकुल-सहदेव, धृष्टद्युम्न, चेदि, कारूष, मत्स्य और केकय देशोंकी सेनाएँ, बलवान् चेकितान तथा उत्तम व्रतका पालन करनेवाले धर्मराज युधिष्ठटिर--ये भयंकर पराक्रम प्रकट करनेवाले रथी, घुड़सवार, हाथीसवार और पैदल सैनिकोंद्वारा रणभूमिमें कर्णको चारों ओरसे घेरकर उसके ऊपर नाना प्रकारके अस्त्र-शस्त्रोंकी वर्षा करने लगे। सभी भयंकर वचन बोलते हुए वहाँ कर्णके वधका निश्चय कर चुके थे
sañjaya uvāca |
cekitānaś ca balavān dharmarājaś ca suvrataḥ |
ete rathāś ca aśvadhiradāḥ pattibhiś cogra-vikramaiḥ ||
เจกิตานผู้ทรงพลัง และธรรมราชยุธิษฐิระผู้มั่นคงในพรต—พร้อมด้วยนักรบรถศึก พลม้า พลช้าง และทหารราบผู้กล้าแข็งดุดัน—ต่างรุกคืบเข้ากดดันกรรณะ
संजय उवाच