Droṇanidhana-anantaraṃ sainya-viṣādaḥ and Karṇa-pravṛttiḥ
After Droṇa’s fall: army despondency and Karṇa’s advance
यस्मादभावी भावी वा भवेदर्थो नरं प्रति । अप्राप्तौ तस्य वा प्राप्ती न कश्चिद् व्यथते बुध:,प्रारब्धवश मनुष्यको अभीष्ट वस्तुकी प्राप्ति हो भी जाती है और नहीं भी होती है। अतः उसकी प्राप्ति हो या न हो, किसी भी दशामें कोई ज्ञानी पुरुष (हर्ष या) कष्टका अनुभव नहीं करता है
ด้วยอำนาจแห่งกรรมที่กำหนดไว้ก่อน มนุษย์ย่อมได้สิ่งที่ปรารถนาบ้าง มิได้บ้าง ฉะนั้นจะได้หรือมิได้—บัณฑิตย่อมไม่หวั่นไหวด้วยยินดีหรือโศกเศร้า
संजय उवाच