
Chapter Arc: धूमिल रणभूमि के शोर के बाद कथा अचानक शान्त हो जाती है—यह अध्याय युद्ध-वृत्तान्त नहीं, द्रोणपर्व के ‘श्रवण-महिमा’ का उद्घोष है: जितना फल वेदाध्ययन से, उतना ही इस पर्व के स्वाध्याय-श्रवण से। → व्यास-वाणी पाठक/श्रोता को कर्मफल के कठोर विधान की याद दिलाती है—घोर कर्मों से उपजे महापाप भी इस पर्व के नित्य पाठ-श्रवण से क्षीण होते हैं; क्षत्रिय के लिए ‘घोर युद्ध’ में यश की प्रतिष्ठा और ब्राह्मण के लिए यज्ञ-फल की समता का प्रतिपादन होता है। → महिमा-वाक्य का शिखर: ‘य इदं पठते पर्व शृणुयाद् वापि नित्यशः—स मुच्यते महापापैः’—यह घोषणा द्रोणपर्व को केवल इतिहास नहीं, पुण्य-प्रद शास्त्र-समकक्ष बनाती है। → चारों वर्णों के लिए फल-श्रुति का समाहार: क्षत्रिय को यश, ब्राह्मण को यज्ञ-प्राप्ति, शेष वर्णों को अभीष्ट कामना-पूर्ति, पुत्र-पौत्र-समृद्धि—और समग्रतः पाप-क्षय।
Verse 1
- १३६ ॥- द्रोणपर्वकी सम्पूर्ण एलोक-संख्या ९९१७८ श्रवण-महिमा स्वधीते यत् फल वेदे तदस्मिन्नपि पर्वणि । क्षत्रियाणामभीरूणां युक्तमत्र महद् यश:
ในทฺโรณปัรวะ จำนวนศฺโลกทั้งหมดมี ๙๙๑๗๘ บท อานิสงส์แห่งการสดับฟังให้ผลเสมอด้วยผลที่พระเวทกล่าวไว้สำหรับผู้ทำสวาธยายะโดยชอบ; ผลนั้นย่อมมีในปัรวะนี้ด้วย และในที่นี้ ยศอันยิ่งใหญ่ย่อมสมควรแก่กษัตริย์ผู้กล้าหาญไร้ความหวาดหวั่น
Verse 2
य इदं पठते पर्व शृणुयाद् वापि नित्यश: । स मुच्यते महापापै: कृतैघोरिश्व॒ कर्मभि:
ผู้ใดสวดอ่านปัรวะนี้เป็นนิตย์ หรือแม้เพียงสดับฟังอยู่ทุกวัน ผู้นั้นย่อมพ้นจากมหาบาปทั้งหลาย แม้บาปที่เกิดจากกรรมอันน่าสะพรึงกลัว
Verse 3
यज्ञावाप्तिब्रल्चिणस्येह नित्यं घोरे युद्धे क्षत्रियाणां यशश्न । शेषौ वर्णो काममिष्टं लभेते पुत्रान् पौत्रान् नित्यमिष्टांस्तथैव
ในโลกนี้ ผลที่พราหมณ์ได้เป็นนิตย์คือผลแห่งยัญญะ; ส่วนในศึกอันน่าสะพรึง ผลที่กษัตริย์ได้เป็นนิตย์คือยศศักดิ์เกียรติคุณ วรรณะอีกสองที่เหลือย่อมได้ผลอันพึงปรารถนาตามใจ—บุตร หลาน และสิ่งสมหวังอื่น ๆ
Verse 9780
[द्रोणपर्व सम्पूर्णम्] अनुष्टुप छन्द (अन्य बड़े छन््द) बड़े छन्दोंको ३२ अक्षरोंके कुलयोग अनुष्ट्प् मानकर गिननेपर उत्तर भारतीय पाठसे लिये गये एलोक-. ९३७९॥ (२९१॥ ) ४००
สัญชัยกล่าวว่า “ณ ที่นี้ ดโรณปรวะสิ้นสุดลงแล้ว” ข้อความนี้เป็นถ้อยคำปิดตอนแบบโคโลฟอนในสำนวนอินเดียเหนือ/ฉบับคีตาเพรส เพื่อประกาศว่าดโรณปรวะจบลง พร้อมหมายเหตุเชิงฉันทลักษณ์/บรรณาธิการว่า ฉันท์ที่ยาวกว่านั้นให้นับเทียบเป็นอนุษฏุภ ๓๒ พยางค์เพื่อการลำดับเลข
Read Mahabharata in the Vedapath app
Scan the QR code to open this directly in the app, with audio, word-by-word meanings, and more.