Arjuna’s Advance toward Bhīṣma; The Gāṇḍīva’s Signal and the Armies’ Convergence (भीष्माभिमुखगमनम् — गाण्डीवनिर्घोष-ध्वजवर्णनम्)
तस्मान्ममाश्चान् संग्रामे यत्त: संयच्छ सारथे । “उसके कुलीन और मदोन्मत्त भाई भी वहीं कवच बाँधकर खड़े हैं। आज तुम्हारे देखते-देखते मैं इन सबका विनाश करूँगा, इसमें संशय नहीं है। अतः सारथे! तुम सावधान होकर संग्राममें मेरे घोड़ोंको काबूमें रखो” || १३ ह ।। एवमुक्क्त्वा तत: पार्थस्तव पुत्र विशाम्पते,राजन्! ऐसा कहकर कुन्तीकुमार भीमने स्वर्णभूषित दस तीखे बाणोंद्वारा आपके पुत्र दुर्योधनको बींध डाला और नन््दककी छातीमें भी तीन बाणोंसे गहरी चोट पहुँचायी
sañjaya uvāca | tasmān mamāśvān saṅgrāme yattaḥ saṃyaccha sārathi |
ฉะนั้น โอสารถี! จงระวังตัวในสนามรบ และควบคุมม้าของข้าให้มั่นคง
संजय उवाच