Bhīmasena’s Kalinga Engagement and the Approach of Bhīṣma (भीमसेन-कालिङ्ग-संग्रामः)
निष्कूजा: समपद्यन्त दृढसत्त्वा महाबला: । धैर्यको दृढ़तापूर्वक धारण किये रहनेवाले दूसरे महाबली वीर बाणोंके आघातसे पीड़ित हो क्लेश सहन करते हुए भी मौन ही रहते थे--अपनी वेदना प्रकाशित नहीं करते थे ।। ४३ कक . अन्ये च विरथा: शूरा रथमन्यस्य संयुगे,महाराज! कुछ वीर पुरुष अपना रथ भग्न हो जानेके कारण युद्धमें पृथ्वीपर गिरकर दूसरेका रथ माँग रहे थे, इतनेहीमें बड़े-बड़े हाथियोंके पैरोंसे वे कुचल गये। उस समय उनके रक्तरंजित शरीर फूले हुए पलाशके समान शोभा पा रहे थे
sañjaya uvāca | niṣkūjāḥ samapadyanta dṛḍhasattvā mahābalāḥ | anye ca virathāḥ śūrā ratham anyasya saṃyuge mahārāja |
เหล่าวีรชนผู้มีกำลังใหญ่และจิตใจมั่นคง อดทนต่อการกระหน่ำของศรโดยไม่เปล่งเสียง ไม่เผยความเจ็บปวดของตน
संजय उवाच