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Shloka 45

Chapter 47: Krauñca-vyūha Deployment and Conch-Signals

Kaurava–Pāṇḍava Readiness

युधिछिर उवाच कथं जयेय॑ संग्रामे भवनन्‍्तमपराजितम्‌ । एतन्मे मन्त्रय हित॑ यदि श्रेय: प्रपश्यसि,युधिष्ठिर बोले--पितामह! आप तो किसीसे पराजित होनेवाले हैं नहीं, फिर मैं आपको युद्धमें कैसे जीत सकूँगा? यदि आप मेरा कल्याण देखते और सोचते हैं तो मेरे हितकी सलाह दीजिये

ยุธิษฐิระกล่าวว่า “ข้าแต่ปิตามหะ ท่านเป็นผู้ไม่อาจพ่ายแพ้ แล้วข้าจะชนะท่านในสมรภูมิได้อย่างไร? หากท่านเห็นแก่ความผาสุกของข้า โปรดประทานคำปรึกษาอันเป็นประโยชน์แก่ข้าด้วยเถิด”

युधिछिर उवाच