Chapter 47: Krauñca-vyūha Deployment and Conch-Signals
Kaurava–Pāṇḍava Readiness
विमुच्य कवचं वीरो निक्षिप्य च वरायुधम् । अवरुह्ा रथात् क्षिप्रंं पद्भधयामेव कृतांजलि:,राजन! तदनन्तर वीर राजा युधिष्ठिरने समुद्रके समान उन दोनों सेनाओंको युद्धके लिये उपस्थित और चंचल हुई देख कवच खोलकर अपने उत्तम आयुधोंको नीचे डाल दिया और रथसे शीघ्र उतरकर वे पैदल ही हाथ जोड़े पितामह भीष्मको लक्ष्य करके चल दिये। धर्मराज युधिष्छिर मौन एवं पूर्वाभिमुख हो शत्रुसेनाकी ओर चले गये
sañjaya uvāca |
vimucya kavacaṁ vīro nikṣipya ca varāyudham |
avaruhya rathāt kṣipraṁ padbhyām eva kṛtāñjaliḥ rājann |
สัญชัยกล่าวว่า—ข้าแต่พระราชา วีรบุรุษนั้นปลดเกราะออก วางอาวุธอันประเสริฐลง แล้วรีบลงจากรถศึก ประนมมือ และก้าวไปด้วยเท้าเปล่า
संजय उवाच