विभूति-योगः (Vibhūti-yoga) — Exemplary Manifestations as a Contemplative Index
पुरुष: स पर: पार्थ भक््त्या लभ्यस्त्वनन्यया । यस्यान्त:स्थानि भूतानि येन सर्वमिदं ततम्,हे पार्थ! जिस परमात्माके अन्तर्गत सर्वभूत हैं और जिस सच्चिदानन्दघन परमात्मासे यह सब जगत परिपूर्ण है,* वह सनातन अव्यक्त परम पुरुष तो अनन्यभक्तिसे ही प्राप्त होनेयोग्य हैः
โอ้ ปารถะ! ปุรุษสูงสุดนั้นพึงบรรลุได้ด้วยภักติอันไม่แบ่งแยกเท่านั้น ในพระองค์สรรพสัตว์ทั้งปวงดำรงอยู่ภายใน และโดยพระองค์นี้เอง สรรพสิ่งทั้งมวลแผ่ซ่านเต็มไป
अजुन उवाच