उत्पातवर्णनम् (Utpāta-varṇanam) — Catalogue of Portents
निश्चेरुरचिषश्चापात् खड्गाश्न॒ ज्वलिता भृशम् | व्यक्त पश्यन्ति शस्त्राणि संग्रामं समुपस्थितम्,योद्धाओंके धनुषसे आगकी लपटें निकलने लगी हैं, खड्ग अत्यन्त प्रज्वलित हो उठे हैं मानो सम्पूर्ण शस्त्र स्पष्टरूपसे यह देख रहे हैं कि संग्राम उपस्थित हो गया है
เปลวเพลิงพุ่งออกจากคันธนูของนักรบ; ดาบทั้งหลายลุกโชติช่วงอย่างรุนแรง ราวกับอาวุธทั้งปวงมองเห็นอย่างแจ่มชัดว่า สงครามได้มาถึงแล้ว
व्यास उवाच