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Shloka 25

Kurukṣetra-sainyadarśana and Arjuna-viṣāda (धर्मक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः — अर्जुनविषाद)

आरोग्यबलसम्पन्नो जीवेद्‌ वर्षशतं तथा । एतदू्‌ दृष्टं प्रसादात्‌ तु मया व्यासस्य धीमत:,इतना ही नहीं, इसका पाठ करनेवाला पुरुष आरोग्य और बलसे सम्पन्न हो सौ वर्षोकी आयुतक जीवित रहता है। यह सब परम बुद्धिमान्‌ भगवान्‌ व्यासजीके कृपा-प्रसादसे मैंने प्रत्यक्ष देखा है

ยิ่งกว่านั้น ผู้สาธยายย่อมสมบูรณ์ด้วยสุขภาพและกำลัง มีอายุยืนถึงร้อยปี. ทั้งหมดนี้ ข้าพเจ้าได้ประจักษ์ด้วยตนเอง ด้วยพระกรุณาแห่งฤๅษีวยาสผู้ทรงปัญญายิ่ง.

संजय उवाच