भीष्मपर्व — अध्याय ११०: पार्थभीमयोः प्रहारः तथा भीष्माभिमुखं संग्रामविस्तारः
Arjuna and Bhima’s pressure; escalation toward Bhishma
यस्याहमधिरुह्याडुकं बाल: किल गदाग्रज । तातेत्यवोचं पितरं पितु: पाण्डोर्महात्मन:,“गदाग्रज! कहते हैं, मैं बचपनमें अपने पिता महात्मा पाण्डुके भी पितृतुल्य भीष्मजीकी गोदमें चढ़कर जब उन्हें तात कहकर पुकारता था, उस समय उस बाल्यावस्थामें ही वे मुझसे इस प्रकार कहते थे--“भरतनन्दन! मैं तुम्हारा तात नहीं, तुम्हारे पिताका तात हूँ।' वे ही वृद्ध पितामह मेरे द्वारा मारनेयोग्य कैसे हो सकते हैं?
yasyāham adhiruhyāṅkaṃ bālaḥ kila gadāgraja | tātety avocaṃ pitaraṃ pituḥ pāṇḍor mahātmanaḥ ||
สัญชัยกล่าวว่า “โอ พี่แห่งผู้ถือคทา! เล่ากันว่าเมื่อข้ายังเป็นเด็ก ข้าเคยปีนขึ้นนั่งบนตักของท่านผู้นั้นแล้วเรียก ‘พ่อ’ แต่ท่านกลับตักเตือนข้าตั้งแต่วัยเยาว์ว่า ‘โอ บุตรแห่งภารตะ! เรามิใช่บิดาของเจ้า เราเป็นบิดาของบิดาเจ้า’ แล้วปิตามหาผู้ชรานั้นจะเป็นผู้ที่ข้าควรฆ่าได้อย่างไร?”
संजय उवाच