भीष्मपर्व — अध्याय ११०: पार्थभीमयोः प्रहारः तथा भीष्माभिमुखं संग्रामविस्तारः
Arjuna and Bhima’s pressure; escalation toward Bhishma
अप्रशस्ते नरे चैव न युद्ध रोचते मम । जब मैं अस्त्र-शस्त्र डाल दूँ, उस अवस्थामें ये महारथी मुझे मार सकते हैं। जिसने शस्त्र नीचे डाल दिया हो, जो गिर पड़ा हो, जो कवच और ध्वजसे शून्य हो गया हो, जो भयभीत होकर भागता हो, अथवा 'मैं तुम्हारा हूँ” ऐसा कह रहा हो, जो स्त्री हो, स्त्रियों-जैसा नाम रखता हो, विकल हो, जो अपने पिताका इकलौता पुत्र हो अथवा जो नीच जातिका हो, ऐसे मनुष्यके साथ युद्ध करना मुझे अच्छा नहीं लगता है || ७७-७८ ह ।। इमं मे शृणु राजेन्द्र संकल्पं पूर्वचिन्तितम्
bhīṣma uvāca | apraśaste nare caiva na yuddhaṃ rocate mama | imaṃ me śṛṇu rājendra saṅkalpaṃ pūrvacintitam ||
ภีษมะกล่าวว่า “ข้าไม่ยินดีจะรบกับบุรุษผู้ประพฤติอันน่าติเตียน โอ้ราชันผู้ประเสริฐ จงฟังปณิธานของข้าที่ตริตรองไว้ก่อนแล้ว”
भीष्म उवाच