भीष्म-पर्व अध्याय १०० — त्रिगर्त-आक्रमण, भीष्म-केन्द्रित पुनर्संयोजन, तथा शक्त्यस्त्र-विनिमय
स तैः परिवृतो राजा प्रदीपै: काउचनैज्वलन् । शुशुभे चन्द्रमा युक्तो दीप्तैरिव महाग्रहै:,उन सुवर्णमय प्रदीपोंसे घिरकर प्रकाशित होनेवाला राजा दुर्योधन दीप्तिमान् महाग्रहोंसे संयुक्त चन्द्रमाके समान शोभा पा रहा था
sa taiḥ parivṛto rājā pradīpaiḥ kāñcanaiḥ jvalan | śuśubhe candramā yukto dīptair iva mahāgrahaiḥ ||
เมื่อถูกห้อมล้อมด้วยประทีปทองคำอันลุกโพลงนั้น พระเจ้าทุรโยธน์ก็ทอประกายงามสง่า ประหนึ่งพระจันทร์ที่มีมหาดาวเคราะห์อันเรืองรองรายล้อม
कर्ण उवाच