Ahaṃkāra as the Second Creation: Brahmā’s Cosmological Instruction (अहंकार-प्राधान्येन सृष्टिवर्णनम्)
यह श्रोत्रादि इन्द्रियरूप देवोंका और मनका उत्पत्ति-स्थान एवं स्वयं भी देवस्वरूप है, इसलिये इसे त्रिलोकीका कर्त्ता माना गया है। यह सम्पूर्ण जगत् अहंकारस्वरूप है, इसलिये यह अभिमन्ता कहा जाता है ।। अध्यात्मज्ञानतृप्तानां मुनीनां भावितात्मनाम् | स्वाध्यायक्रतुसिद्धानामेष लोक: सनातन:,जो अध्यात्मज्ञानमें तृप्त, आत्माका चिन्तन करनेवाले और स्वाध्यायरूपी यज्ञमें सिद्ध हैं, उन मुनिजनोंको यह सनातन लोक प्राप्त होता है
adhyātmajñānatṛptānāṁ munīnāṁ bhāvitātmanām | svādhyāyakratusiddhānām eṣa lokaḥ sanātanaḥ ||
พระวายุตรัสว่า “สำหรับเหล่ามุนีผู้เอิบอิ่มด้วยญาณภายใน (อัธยาตมะ) ผู้ฝึกตนและเพ่งพินิจอาตมัน และผู้บรรลุความสำเร็จด้วยยัญแห่งสวาธยายะ (การศึกษาพระเวท) โลกนี้เองเป็นโลกนิรันดร์ที่เขาทั้งหลายพึงได้”
वायुदेव उवाच