Brahma-vidyā: Satya–Tapas and the Enumeration of Tattvas
Arjuna–Vāsudeva framed dialogue
छायाभूताय दान्ताय यतते ब्रह्मचारिणे । तान् प्रश्नानब्रवीत् पार्थ मेधावी स धृतव्रत: । गुरु: कुरुकुलश्रेष्ठ सम्यक् सर्वानरिंदम,भगवान् श्रीकृष्णने कहा--कुरुकुलश्रेष्ठ शत्रुदमन अर्जुन! वह शिष्य सब प्रकारसे गुरुकी शरणमें आया था। यथोचित रीतिसे प्रश्न करता था। गुणवान् और शान्त था। छायाकी भाँति साथ रहकर गुरुका प्रिय करता था तथा जितेन्द्रिय, संयमी और ब्रह्मचारी था। उसके पूछनेपर मेधावी एवं व्रतधारी गुरुने पूर्वोक्त सभी प्रश्नोंका ठीक-ठीक उत्तर दिया
chāyābhūtāya dāntāya yatate brahmacāriṇe | tān praśnān abravīt pārtha medhāvī sa dhṛtavrataḥ ||
โอ้ปารถะ ศิษย์ผู้นั้นรับใช้ใกล้ชิดดุจเงา เป็นผู้สำรวม มีตนอยู่ในวินัย และเพียรในพรหมจรรย์ ครูผู้มีปัญญาและมั่นคงในวัตร—โอ้ยอดแห่งวงศ์กุรุ ผู้ปราบศัตรู—จึงตอบคำถามทั้งปวงอย่างถูกต้องเหมาะควร
वायुदेव उवाच