कर्मनाशाभावः, गर्भे जीवप्रवेशः, आचारधर्मोपदेशः
Karma’s Non-Extinction, Jīva’s Entry into the Embryo, and Instruction on Conduct-Dharma
शुक्रे शोणितसंसूष्टं स्त्रिया गर्भाशयं गतम् । क्षेत्र कर्मजमाप्रोति शुभं वा यदि वाशुभम्,जीव पहले पुरुषके वीर्यमें प्रविष्ट होता है, फिर स्त्रीके गर्भाशयमें जाकर उसके रजमें मिल जाता है। तत्पश्चात् उसे कर्मानुसार शुभ या अशुभ शरीरकी प्राप्ति होती है
ชีวะเข้าสู่เชื้อของบุรุษก่อน แล้วจึงไปสู่ครรภ์ของสตรีและประสานกับระดูของนาง จากนั้นตามกรรมของตน ย่อมได้กายอันเป็นมงคลหรืออัปมงคล
ब्राह्मण उवाच