Marutta’s Sacrifice: Indra’s Threat, Saṃvarta’s Mantric Restraint, and Divine Reconciliation (अध्याय १०)
व्यास उवाच ततो गत्वा धृतराष्ट्रो नरेन्द्र प्रोवाचेदं वचनं वासवस्य,व्यासजी कहते हैं--तब गन्धर्वराज धृतराष्ट्र राजा मरुत्तके पास गये और उनसे इन्द्रका संदेश इस प्रकार कहने लगे--“महाराज! आपको विदित हो कि मैं धृतराष्ट्र नामक गन्धर्व हूँ और आपको देवराज इन्द्रका संदेश सुनाने आया हूँ। राजसिंह! सम्पूर्ण लोकोंके स्वामी महामना इन्द्रने जो कुछ कहा है, उनका वह वाक्य सुनिये
vyāsa uvāca | tato gatvā dhṛtarāṣṭro narendra provācedaṃ vacanaṃ vāsavasya |
วยาสกล่าวว่า “แล้วธฤตราษฏระก็ไปเฝ้าพระเจ้ามรุตตะ และกล่าวถ้อยคำของวาสวะ (อินทรา) แก่พระองค์ดังนี้”
व्यास उवाच