छत्रोपानहदानफलप्रशंसा — Praise of the Merit of Donating Umbrella and Footwear
शास्त्राणि दानानि तथा संयोगा वित्तसंचया: । अन्नतः सम्प्रवर्तन्ते तथा त्वं वेत्थ भार्गव,“जातकर्म, व्रत, उपनयन, विवाह, गोदान, यज्ञ सम्पत्ति, शास्त्रीय दान, संयोग और धनसंग्रह आदि सारे कार्य अन्नसे ही सम्पादित होते हैं। भूुगुनन्दन! इस बातको आप भी अच्छी तरह जानते हैं
คัมภีร์ (ศาสตรา) การให้ทาน ความสัมพันธ์/การคบหา และการสั่งสมทรัพย์—ล้วนดำเนินไปได้ด้วยอันนะ; โอ้ ภารควะ ท่านก็ย่อมรู้ข้อนี้
भीष्म उवाच