अनुशासनपर्व अध्याय ९३ — तपस्, सदोपवास, विघसाशन, अतिथिप्रियता
Austerity, regulated fasting, residual-eating, and hospitality
ब्राह्मणो हानधीयानस्तृणाग्निरिव शाम्यति । तस्मै श्राद्ध न दातव्यं न हि भस्मनि हूयते,जैसे घास-फ़्सकी आग शीघ्र ही शान्त हो जाती है, उसी प्रकार स्वाध्यायहीन ब्राह्मण तेजहीन हो जाता है, अतः उसे श्राद्धका दान नहीं देना चाहिये, क्योंकि राखमें कोई भी हवन नहीं करता
ภีษมะกล่าวว่า—พราหมณ์ผู้ขาดสวาธยายะ (svādhyāya) ย่อมดับลงดุจไฟที่ไหม้หญ้าแห้งซึ่งสงบลงโดยเร็ว ฉะนั้นไม่ควรให้ทานศราทธะแก่เขา เพราะไม่มีผู้ใดทำโฮมะลงในเถ้าถ่าน.
भीष्म उवाच