गोमूल्यनिर्णयः — The Determination of Value through the Cow
Nahuṣa–Cyavana Episode
तेषामेतेन विधिना जातानां वर्णसंकरे । को धर्म: कानि कर्माणि तनमे ब्रूहि पितामह,युधिष्ठिरने पूछा--पितामह! धन पाकर या धनके लोभमें आकर अथवा कामनाके वशीभूत होकर जब उच्च वर्णकी स्त्री नीच वर्णके पुरुषके साथ सम्बन्ध स्थापित कर लेती है तब वर्णसंकर संतान उत्पन्न होती है। वर्णोका निश्चय अथवा ज्ञान न होनेसे भी वर्णसंकरकी उत्पत्ति होती है। इस रीतिसे जो वर्णोके मिश्रणद्वारा उत्पन्न हुए मनुष्य हैं, उनका क्या धर्म है? और कौन-कौन-से कर्म हैं? यह मुझे बताइये
yudhiṣṭhira uvāca |
teṣām etena vidhinā jātānāṁ varṇa-saṅkare |
ko dharmaḥ kāni karmāṇi tan me brūhi pitāmaha ||
ยุธิษฐิระทูลว่า “โอ้ ปิตามหะ! ผู้ที่เกิดเป็นวรรณะสังกรด้วยวิธีนี้ พึงมีธรรมอันใด และพึงประกอบกิจหน้าที่ใด ขอท่านโปรดบอกแก่ข้าพเจ้า”
युधिषछ्िर उवाच