Devaśarmā–Vipula Dialogue on Ahorātra–Ṛtu as Moral Witnesses (अनुशासन पर्व, अध्याय ४३)
असाध्व्यस्तु समुत्पन्ना: कृत्या: सर्गात् प्रजापते: । ताभ्य: कामान् यथाकामं प्रादाद्धि स पितामह:,कुन्तीनन्दन! सृष्टिके प्रारम्भमें यहाँ सब स्त्रियाँ पतिव्रता ही थीं। कृत्यारूप दुष्ट स्त्रियाँ तो प्रजापतिकी इस नूतन सृष्टिसे ही उत्पन्न हुई हैं। प्रजापतिने उन्हें उनकी इच्छाके अनुसार कामभाव प्रदान किया
asādhvyaḥ tu samutpannāḥ kṛtyāḥ sargāt prajāpateḥ | tābhyaḥ kāmān yathākāmaṃ prādād dhi sa pitāmahaḥ, kuntīnandana |
แต่สตรีผู้ไม่ตั้งอยู่ในธรรม—จำพวก ‘กฤตยา’—ได้บังเกิดจากการสร้างสรรค์ภายหลังของปรชาปติ และโอ บุตรแห่งกุนตี ปิตามหะ (ปรชาปติ) ได้ประทานแรงผลักแห่งกามตามความปรารถนาของนางเหล่านั้นโดยแท้
भीष्म उवाच