Devaśarmā–Vipula Dialogue on Ahorātra–Ṛtu as Moral Witnesses (अनुशासन पर्व, अध्याय ४३)
अपि विश्वकृता तात येन सृष्टमिदं जगत् । पुनरन्तर्हित: शक्रो दृश्यते ज्ञानचक्षुषा,वे मक्खी और मच्छर आदिके भी रूप धारण करते हैं। विपुल! कोई भी उन्हें पकड़ नहीं सकता। तात! औरोंकी तो बात ही क्या है? जिन्होंने इस संसारको बनाया है वे विधाता भी उन्हें अपने काबूमें नहीं कर सकते। अन्तर्धान हो जानेपर इन्द्र केवल ज्ञानदृष्टिसे दिखायी देते हैं
api viśvakṛtā tāta yena sṛṣṭam idaṁ jagat | punar antarhitaḥ śakro dṛśyate jñānacakṣuṣā ||
โอ้ลูกเอ๋ย แม้แต่ผู้สร้างสรรพโลก ผู้ให้กำเนิดจักรวาลนี้ เมื่อศักระอินทราเร้นกายแล้ว ก็ยังเห็นได้เพียงด้วยดวงตาแห่งญาณเท่านั้น
भीष्म उवाच