पात्रलक्षण-परिक्षा (Pātra-Lakṣaṇa Parīkṣā) — Criteria for a Worthy Recipient
वायुदेव उवाच मातरं सर्वभूतानां पृच्छे त्वां संशयं शुभे । केनस्वित् कर्मणा पाप॑ व्यपोहति नरो गृही,श्रीकृष्णने पूछा--शुभे! तुम सम्पूर्ण भूतोंकी माता हो, इसलिये मैं तुमसे एक संदेह पूछ रहा हूँ। गृहस्थ मनुष्य किस कर्मके अनुष्ठानसे अपने पापका नाश कर सकता है?
พระวายุเทพตรัสว่า “โอ้ผู้เป็นมงคลเอ๋ย เจ้าเป็นมารดาแห่งสรรพสัตว์ทั้งปวง ฉะนั้นเราจึงขอถามข้อสงสัยนี้: คฤหัสถ์พึงประกอบกรรมอันใด จึงจะขจัดบาปของตนได้?”
वायुदेव उवाच